Ganesh Chaturthi arti | A Guide on Arti
देशभर में आज गणेश चतुर्थी की धूम है। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में भगवान गणेश के जन्मदिन के अवसर आज से 12 सितंबर तक गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। गणेश चतुर्थी को गणेश चौथ, विनायक चतुर्थी और कलंक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। गणेश चतुर्थी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी की विधि विधान से पूजा की जाती है। पूजा में उनको दूर्वा चढ़ाई जाती है और विशेषकर मोदक का भोग लगाया जाता है। भगवान गणेश को मोदक अतिप्रिय है। भगवान गणेश प्रसन होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करते हैं।
पूजा के पश्चात गणेश जी की आरती जरूरी मानी जाती है। पूजा के बाद आप कपूर या फिर घी का दीपक जलाकर गणेश जी आरती करें। इस दौरान घंटी और शंख जरूर बजाएं। ऐसे करने से आपके मन और आस-पास जो भी नकारात्मकता है, वो खत्म हो जाता है।
आप सभी इस बात से वाकिफ ही होंगे कि हिंदू धर्म के अनुसार गणेश जी का पूजन बहुत धूम धाम से किया जाता है. ऐसे में बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित होता है लेकिन इस बार गणेश चतुर्थी सोमवार को यानी 2 सितंबर को है. ऐसे में गणेश चतुर्थी का दिन गणपति बप्पा जी की पूजा का दिन है और भगवान गणेश दुखों का नाश और संकट दूर करने वाले देवता माने गए हैं. इसी के साथ कहा जाता है इनकी पूजा सभी देवी देवताओं से पहले होती है और गणेश सभी के कष्टों को हर लेने वाले हैं. कहते हैं जिस दिन गणेश चतुर्थी होती है उस दिन गणेश जी कि स्थापना की जाती है लेकिन उसी के साथ उनकी आरती जरुरी मानी जाती है. कहते हैं बिना गणेश जी की आरती के पूजा सम्पन्न नहीं होती है तो ऐसे में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं गणेश जी की आरती जो आप गणेश चतुर्थी के दिन जरूर करनी चाहिए.
गणेश जी की आरती....
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी. माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा. लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा. लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया. बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा. माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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